नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर पालिका अधिनियम और म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अधिनियम में तीन बच्चों वाले व्यक्तियों के निकाय चुनाव लड़ने पर लगी रोक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। कोर्ट की खंडपीठ ने मामले में महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।याचिकाकर्ता ऊधमसिंह नगर के किच्छा निवासी नईम उल ने नगर पालिका अधिनियम (संशोधन) 2003 की धारा-3 को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2003 के बाद जिन व्यक्तियों के तीन बच्चे हैं, उन्हें नगर निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है। वहीं, पंचायत चुनावों के लिए यह प्रावधान 27 सितंबर 2019 के बाद लागू किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वह पहले ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते थे और पंचायत चुनाव लड़ने के पात्र थे, लेकिन ग्राम पंचायत क्षेत्र को नगर पालिका में शामिल किए जाने के बाद वे स्वतः नगर निकाय क्षेत्र में आ गए और तीन बच्चों की शर्त के कारण चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए। इसे उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन और भेदभावपूर्ण व्यवस्था बताया है।याचिका में यह भी कहा गया है कि नगर निकायों का विस्तार ग्राम पंचायत क्षेत्रों को शामिल कर किया जाता है। ऐसे में एक ही राज्य में समान प्रकृति के चुनावों के लिए अलग-अलग तिथियों और अलग-अलग पात्रता मानदंड लागू करना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है। इसी आधार पर संबंधित प्रावधान पर रोक लगाने की मांग की गई है।
मामले पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।







