नैनीताल। ज्योलीकोट और आसपास के गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान तथा सरियाताल गांवों में दूषित पेयजल से फैली जलजनित बीमारियों के मामले में मंगलवार को उत्तराखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान नैनीताल जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक और उत्तराखंड पेयजल निगम (कुमाऊं मंडल) के मुख्य अभियंता व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उत्तराखंड जल संस्थान को पेयजल लाइनों का निरीक्षण कर उन्हें दुरुस्त करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। वहीं, जिलाधिकारी नैनीताल को सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्यों की निगरानी करने को कहा गया है।
कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को प्रभावित गांवों के साथ ही नैनीताल शहर से भी पेयजल के नमूने लेकर जांच कराने और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कुमाऊं क्षेत्र में पेयजल की जांच के लिए टेस्टिंग लैब स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
●दो लोगों की मौत का याचिका में किया गया उल्लेख..
ज्योलिकोट निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट की ओर से हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि नैनीताल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी पीने से फैली बीमारी के चलते उपचार के दौरान दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, क्षेत्र में रहने वाले कई लोगों को बीमारी के उपचार के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
याचिका में कोर्ट से ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और बीमार लोगों को समुचित उपचार की सुविधा मुहैया कराने की मांग की गई है, ताकि प्रभावित ग्रामीणों को राहत मिल सके।







