नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव में महिला आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी चुनौती पर शुक्रवार को हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट के आदेश के बाद छात्रसंघ चुनाव में तय आरक्षण व्यवस्था के लागू रहने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने माना कि छात्रसंघ चुनाव में आरक्षण तय करने और इस संबंध में शासनादेश (जीओ) जारी करने का अधिकार सरकार के पास है।छात्रसंघ चुनाव में महिला आरक्षण को लेकर कई छात्र नेताओं की ओर से हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाओं में सरकार की ओर से जारी महिला आरक्षण संबंधी जीओ को असंवैधानिक बताते हुए उसे चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि छात्रसंघ चुनाव की तारीखों की घोषणा 10 सितंबर को कर दी गई थी, जबकि आरक्षण संबंधी शासनादेश 18 सितंबर को जारी हुआ। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद आरक्षण व्यवस्था लागू किए जाने पर सवाल उठाए गए थे।
कुछ याचिकाओं में कुमाऊं विश्वविद्यालय के स्वायत्त संस्थान होने का हवाला देते हुए सरकार के चुनाव संबंधी आदेश जारी करने के अधिकार को भी चुनौती दी गई थी। याचिकाओं में महिला आरक्षण के दायरे को लेकर भी सवाल उठाए गए। शासन की ओर से जारी व्यवस्था में कोषाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद छात्राओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि अध्यक्ष और सचिव पदों पर आरक्षण लागू नहीं किया गया है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद छात्र नेताओं की ओर से दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही छात्रसंघ चुनाव में लागू आरक्षण व्यवस्था को लेकर चल रहा कानूनी विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है। आदेश के बाद अब निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।







