नैनीताल। नीट काउंसलिंग में स्वतंत्रता सेनानी समेत विभिन्न श्रेणियों के कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने का मामला सामने आया है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने संबंधित प्रमाणपत्रों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देशित किया है कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाए। सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच के लिए पहले ही विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जा चुका है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि नीट की पहली और दूसरी काउंसलिंग के दौरान कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी पाई गई। प्रमाणपत्रों पर दर्ज नाम और संख्या के दूसरे व्यक्तियों से संबंधित होने की बात सामने आई। याचिकाकर्ता के अनुसार, जांच में स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्रों के अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाणपत्र समेत आरक्षण का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल किए गए अन्य दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठे हैं।
याचिका में करीब 770 अभ्यर्थियों के उत्तराखंड का निवासी होने के दावे पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इनमें ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिनकी स्कूली शिक्षा तमिलनाडु, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में हुई है, लेकिन उन्होंने उत्तराखंड से संबंधित प्रमाणपत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एसआईटी गठित किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद कोर्ट ने राजस्व सचिव को संबंधित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए। सत्यापन और जांच के निर्देशों के साथ जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया गया।
अब संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच में यह स्पष्ट होगा कि किन अभ्यर्थियों के दस्तावेज सही हैं और किन मामलों में अनियमितता पाई जाती है।







