ऐपण प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई लोककला की प्रतिभा.. ऐपण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों व महिलाओं ने लिया हिस्सा… रिपोर्ट- (सुनील भारती) ‘स्टार खबर’ नैनीताल…

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नैनीताल। उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और लोक संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से शनिवार को वृंदावन पब्लिक स्कूल में ऐपण प्रतियोगिता आयोजित की गई। साह-चौधरी समाज नैनीताल और वृंदावन पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में हुई 13वीं चंद्र लाल साह विद्यालय स्तरीय ऐपण प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के 45 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। वहीं, तीसरी राजेंद्र लाल साह ओपन ऐपण प्रतियोगिता में 15 महिलाओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर सनवाल स्कूल ने टीम चैंपियनशिप अपने नाम की।प्रतियोगिता में नैनीताल और हल्द्वानी के विद्यार्थियों ने पारंपरिक ऐपण के माध्यम से लोक आस्था, धार्मिक प्रतीकों और कुमाऊं की सांस्कृतिक परंपराओं को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। बच्चों की रचनात्मकता और पारंपरिक कला के प्रति रुचि ने आयोजन को खास बनाया। आधुनिकता के दौर में विद्यार्थियों की लोक विरासत के प्रति दिलचस्पी को उपस्थित लोगों ने सराहा।

● अस्मिता परिहार ने हासिल किया पहला स्थान

विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में सनवाल स्कूल की अस्मिता परिहार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर की गीतांजलि हल्सी दूसरे और सनवाल स्कूल की दिव्यांशी बोहरा तीसरे स्थान पर रहीं। इसके अलावा पंखुड़ी गोस्वामी को चौथा, भारती जोशी को पांचवां, यामिनी राजपूत को छठा, ज्योत्सना आर्या को सातवां और आयुषी को आठवां स्थान मिला। प्रतियोगिता में जीजीआईसी नैनीताल, ऐशडेल स्कूल, सनवाल स्कूल, मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, ऑल सेंट्स कॉलेज, नगर पालिका स्कूल काठगोदाम और भारतीय शहीद सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

●ओपन प्रतियोगिता में निहारिका साह अव्वल..

तीसरी राजेंद्र लाल साह ओपन ऐपण प्रतियोगिता में निहारिका साह ने पहला पुरस्कार प्राप्त किया। अंकिता रौतेला दूसरे, याशवी रावत तीसरे, कमला धामी चौथे और अंजलि बुधलाकोटी पांचवें स्थान पर रहीं। विजेताओं को नकद पुरस्कार और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलसचिव डॉ. रितेश साह ने प्रतिभागियों की कलाकृतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का अपनी संस्कृति और पारंपरिक कलाओं से जुड़ाव उत्साहजनक है। इस तरह के आयोजन बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ लोककलाओं के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।विशिष्ट अतिथियों में ताल चैनल की प्रबंधक ईशा साह, किंग प्रेस के प्रबंधक घनश्याम लाल साह, भारत टेंट हाउस के प्रबंधक कान्हा साह और चौधरी कंस्ट्रक्शन के प्रबंधक विमल चौधरी मौजूद रहे। समाज के कार्यक्रमों में सहयोग के लिए अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।प्रतियोगिता में बृजमोहन जोशी, शीला साह, सुधा साह, जानकी साह और मंजू साह ने निर्णायक की भूमिका निभाई। प्रतिभागियों की कलात्मक अभिव्यक्ति, पारंपरिक शैली और ऐपण की बारीकियों के आधार पर मूल्यांकन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र साह ने किया। साह-चौधरी समाज के अध्यक्ष मनोज साह और सचिव शैलेंद्र चौधरी ने प्रतिभागियों, शिक्षकों, अतिथियों और आगंतुकों का आभार जताया। आयोजन की संयोजक राखी साह और सह-संयोजक भारती साह के योगदान की भी सराहना की गई।
इस अवसर पर हितेश साह, हर्षित साह, मोहित लाल साह, किशन लाल साह, सुरेश लाल साह, सुरेश चौधरी, विमल चौधरी, बिमल साह, ललित मोहन साह, आलोक साह, मोहित साह, अमिता साह, ज्योति चौधरी, दीपा चौधरी, मनीष साह, दिग्विजय साह, दिग्विजय चौधरी सहित विद्यालय की शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।