नैनीताल में DM के अधिकार क्षेत्र पर कब्जा… सरकारी जमीन में खुद कब्जा करने वाली संस्था ने जारी कर दिया नमाज के लैटर.. मुख्यमंत्री के आदेश का उलंघन तो बदले सुर.

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नैनीताल – नैनीताल से राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सीधे चुनौती मिली है। ये किसी और ने नहीं बल्कि बीजेपी के पूर्व मंडल अध्यक्ष व वर्तमान में निजी संस्था के महासचिव मनोज जोशी ने दी है..सिर्फ सीएम को चुनौती ही नहीं बल्कि डीएम के अधिकार क्षेत्र पर भी अतिक्रमण किया गया है और फील्ड में नमाज की अनुमति तक दे डाली..जब विरोध हुआ तो फिर एक लैटर जारी कर कहा कि मेरे अधिकार क्षेत्र का मामला ही नहीं है और नमाज पढ़ने की अनुमति को निरस्त किया जाता है।
दरअसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सड़कों और खुले में सरकारी जमीन पर नमाज ना अदा करने के निर्देश दिए थे और कहा था कि वो किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं..सीएम ने कल ही ये बात कही लेकिन आज बीजेपी के पूर्व मंडल अध्यक्ष व नैनीताल जिमखाना डीएसए महासचिव मनोज जोशी ने अंजुमन इस्लामिया को ईद की नमाज के लिए फील्ड यानी सरकारी जमीन जो नजूल है उसको दे दिया, हालांकि जैसे ही पत्र सामने आया तो पार्टी से लेकर समाज मे खलबली मची की कैसे मुख्यमंत्री के आदेश को दरकिनार कर दिया गया जिसके बाद महासचिव मनोज जोशी ने फिर एक पत्र जारी किया जिसमें पहले की अनुमति को निरस्त कर दिया गया। लेकिन सवाल बड़ा ये है कि डीएम नैनीताल के अधिकार क्षेत्र को भी इस दौरान अतिक्रमण किया गया और जो आदेश डीएम नैनीताल से जारी होना था उसको कैसे डीएसए महासचिव ने जारी किया इस पर भी चर्चा है। इससे डीएम की कार्यप्रणाली पर भी सीधे सवाल इस लिए भी खड़े हो रहे हैं कि कैसे कोई जिसने सरकारी जमीन पर कब्जा किया हो वो संस्था ये आदेश कैसे जारी कर सकती है। क्योंकि 1960 के बाद डीएसए की लीज खत्म हो गयी थी और एक संस्था द्वारा नैनीताल के फ्लैट्स मैदान से लेकर भवन पर कब्जा किया है। सीएम के निर्देशों और घोषणा के बाद भी इसको खाली नैनीताल डीएम नहीं करा सके और कई अधिकारी कई मौकों पर इस संस्था के सामने नागमस्तक दिखाई दिए हैं..

बता दें कि 25 मई 2026 को डीएसए अवैतनिक महासचिव मनोज जोशी की ओर से जारी पत्र संख्या डीएसए/64/2026 में डीएसए ने अंजुमन इस्लामिया, नैनीताल को 28 मई 2026 को ईद की नमाज हेतु मैदान आवंटित करने की अनुमति दी थी। पत्र में निर्धारित समय एवं व्यवस्था के अनुसार मैदान उपयोग सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। लेकिन इसके बाद डीएसए महासचिव मनोज जोशी की ओर से दूसरा पत्र डीएसए/66/2026 जारी कर पूर्व आदेश को रद्द कर दिया गया। निरस्तीकरण आदेश में कहा गया कि डीएसए एवं नैनीताल जिमखाना का मैदान मुख्यतः खेल गतिविधियों के लिए है तथा किसी भी धार्मिक कार्यक्रम की अनुमति देने से पूर्व प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होती है, जो संस्था को प्राप्त नहीं थी।पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि धार्मिक गतिविधियां डीएसए के कार्यक्षेत्र से बाहर हैं और ऐसे कार्यक्रम संबंधित धार्मिक स्थलों पर आयोजित किए जाने चाहिए। इसी आधार पर पूर्व में जारी आदेश को “विधिसम्मत एवं वैध नहीं” बताते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।

इस घटनाक्रम के बाद शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ईद की नमाज के लिए मैदान आवंटन और फिर अचानक आदेश निरस्त होने से प्रशासनिक समन्वय और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।