नैनीताल झील में 30 साल बाद लौटी ‘असेला’.. स्नो ट्राउट के पुनरुद्धार से पारिस्थितिकी तंत्र में नई उम्मीद… रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर ” नैनीताल..

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नैनीताल। नैनीताल की विश्वप्रसिद्ध झील के संरक्षण और जैव-विविधता की दिशा में आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। लगभग तीन दशकों से झील से विलुप्त हो चुकी ‘स्नो ट्राउट’ जिसका स्थानीय नाम असेला मछली को आज पुनः झील में डाला गया। कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत की उपस्थिति में स्नो ट्राउट की 300 अंगुलिकाओं (फिंगरलिंग्स) को झील में बने केजों में संचित किया गया।
●प्रयोगशाला से झील तक का सफर
यह पुनरुद्धार परियोजना कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत के संरक्षण में जन्तु विज्ञान विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। विभागाध्यक्ष व प्रधान अन्वेषक प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट और सह-अन्वेषक डॉ. सीता देवली के नेतृत्व में, मत्स्य बीज (फ्राई) को डी.एस.बी. परिसर की प्रयोगशाला में आर.ए.एस. पद्धति- के माध्यम से विकसित किया गया। लंबे शोध और संवर्धन के बाद, इन मछलियों को अब उनके प्राकृतिक आवास में स्थानांतरित किया गया है।
●क्यों विलुप्त हुई थी स्नो ट्राउट?-
स्नो ट्राउट भारत की एक महत्वपूर्ण धरोहर और ‘स्पोर्टफिश’ है, जो केवल 0 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले स्वच्छ जल में जीवित रहती है। 1990 के दशक तक यह नैनीताल सहित भीमताल और सातताल जैसी झीलों में प्रचुर मात्रा में थी। लेकिन:
●मानवीय हस्तक्षेप
अत्यधिक दोहन और पारिस्थितिक असंतुलन।
●यूट्रोफिकेशन:
झील में पोषक तत्वों की अधिकता से काई बढ़ना और ऑक्सीजन की कमी।
●विदेशी प्रजातियां-
गम्बूसीया ऐफिनीस जैसी प्रजातियों के कारण जैव-विविधता पर बुरा असर पड़ा।
●पारिस्थितिकी सुधार के निरंतर प्रयास से
झील को बचाने के लिए 2007 से ही ‘ऐरियेशन प्लांट’ और विभिन्न मत्स्य प्रजातियों (जैसे ग्रास कार्प और महाशीर) के माध्यम से जैविक नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में ‘बायो-मैग्निफिकेशन’ परियोजना के तहत विदेशी प्रजातियों को निकालकर झील के वातावरण को स्नो ट्राउट के अनुकूल बनाया गया है। वर्तमान में झील का रासायनिक संतुलन (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस आदि) इस प्रजाति की वृद्धि के लिए उपयुक्त पाया गया है।
इस उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंदरवाल, निदेशक प्रो. चन्द्रकला रावत, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ललित तिवारी, और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल सहित जन्तु विज्ञान विभाग के समस्त प्राध्यापक (प्रो. मनोज कुमार आर्या, प्रो. दीपिका गोस्वामी, डॉ. मुकेश सामन्त आदि) एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।