प्रकृति के प्रहरी सम्मान समारोह में वनकर्मियों का हुआ गौरवपूर्ण सम्मान, राज्यपाल ने किया पुस्तक विमोचन…. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर ” नैनीताल…

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लोक भवन नैनीताल में आयोजित समारोह में वन एवं वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को मिला सम्मान

नैनीताल। लोक भवन नैनीताल में मंगलवार को आयोजित “प्रकृति के प्रहरी” वनकर्मी सम्मान एवं पुस्तक विमोचन समारोह में उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन तथा वन्यजीव सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विभिन्न वनकर्मियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए गए।
सम्मानित होने वालों में वन क्षेत्राधिकारी नितिन पन्त, विजेन्द्र सिंह अधिकारी, उप वन क्षेत्राधिकारी डब्बल सिंह खाती, वन दरोगा विजेन्द्र चौहान, राजेन्द्र रावत, आरती पन्त, गजेन्द्र सिंह गड़िया, प्रकाश गिरि, कंचन नौटियाल, वन आरक्षी अरुण सिंह, गोविन्द कुमार, कीर्ति, तेजराम, प्रेमा तिवारी, क्यूआरटी सदस्य जितेन्द्र सिंह, डाकिया शंकरीलाल तथा महावत रूपन बसुमतारी सहित अन्य कार्मिक शामिल रहे।
इस अवसर पर राज्यपाल ने वन संरक्षण और पर्यावरण विषयक चार महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी विमोचन किया। इनमें “Common Birds of Almora & Nainital”, “From Roots to Riches”, “Beehive Fencing” तथा “राजाजी में पूर्णिमा की वह रात” शामिल हैं। पुस्तकों के लेखकों एवं सह-लेखकों में वन संरक्षक चन्द्रशेखर जोशी, दीपक सिंह, डॉ. अभिलाषा सिंह, कुन्दन कुमार तथा अजय लिंगवाल शामिल रहे।
कार्यक्रम में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने स्वागत भाषण देते हुए उत्तराखण्ड की वन संरक्षण परंपरा तथा वनकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं अपर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. विवेक पाण्डेय ने वन्यजीव संरक्षण, वनाग्नि नियंत्रण, वनीकरण, वन अपराध नियंत्रण एवं आधुनिक तकनीक के माध्यम से वन संरक्षण के प्रयासों की जानकारी दी।
अपने संबोधन में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि वन केवल वृक्षों का समूह नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और जीवनशैली का आधार हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों के दौर में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने वनकर्मियों को प्रकृति का सच्चा प्रहरी बताते हुए उनके समर्पण और सेवा भावना की सराहना की।
राज्यपाल ने वन अधिकारियों को वनों, वन्यजीवों और जैव विविधता पर अधिक से अधिक साहित्य सृजन करने की प्रेरणा दी तथा वन कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी बल दिया। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की सराहना करते हुए इसे प्रकृति और मानव के बीच भावनात्मक संबंध का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम के दौरान प्रमुख वन संरक्षक डॉ. एस.पी. सुबुद्धि ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊँ डॉ. तेजस्विनी अरविन्द पाटील ने आभार व्यक्त करते हुए वन विभाग की ओर से राज्यपाल का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त प्रवक्ता एवं उद्घोषक हेमन्त बिष्ट ने किया, जिसकी राज्यपाल ने विशेष प्रशंसा की।
समारोह में प्रमुख वन संरक्षक डॉ. एस.पी. सुबुद्धि, अपर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. विवेक पाण्डेय, मुख्य वन संरक्षक डॉ. तेजस्विनी अरविन्द पाटील, निदेशक कॉर्बेट टाइगर रिजर्व डॉ. साकेत बडोला सहित कुमाऊँ एवं गढ़वाल क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ वन अधिकारी, प्रभागीय वनाधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी तथा वन कर्मचारी उपस्थित रहे।