नैनीताल। किलबरी–पंगोट वन क्षेत्र के बीच घने देवदार, बांज और बुरांश के जंगलों में स्थित नैना देवी जल कुंड इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शांत वातावरण, स्वच्छ प्राकृतिक जल स्रोत, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य इस स्थल को नैनीताल के प्रमुख “हिडन जेम” के रूप में पहचान दिला रहे हैं।

हालांकि, पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

पर्यटकों का कहना है कि जल कुंड परिसर में वॉशरूम, कैंटीन और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे खासकर परिवार और दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि इन सुविधाओं का विकास किया जाए तो यह स्थल पर्यटन की दृष्टि से और अधिक आकर्षक बन सकता है।
स्थानीय निवासी भुवन सिंह कार्की ने बताया कि कूड़ा निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पर्यटक प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट और अन्य कचरा जंगलों में ही फेंक रहे हैं। इससे क्षेत्र का पर्यावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है और वन्य जीवों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि काफी समय से पार्क का उचित रखरखाव और मरम्मत भी नहीं की गई है, जिससे कई स्थानों पर अव्यवस्था दिखाई देती है।
किलबरी और पंगोट क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता और पक्षी विहार के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में बर्ड वॉचर और प्रकृति प्रेमी यहां पहुंचते हैं। मुख्य पर्यटन स्थलों की भीड़-भाड़ से दूर होने के कारण यह स्थान सुकून की तलाश में आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने वन विभाग से मांग की है कि जल कुंड परिसर में वॉशरूम, कैंटीन, कूड़ेदान, नियमित सफाई, कचरा निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था तथा पार्क का समय-समय पर रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुविधाएं विकसित की गईं तो नैना देवी जल कुंड न केवल पर्यटकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनेगा, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण का संरक्षण भी बेहतर ढंग से हो सकेगा।







