हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध में लामबंद हुए अधिवक्ता, आंदोलन की रणनीति पर मंथन…. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल..

15
Oplus_16908288

नैनीताल। नैनीताल से उत्तराखंड हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। मामले को लेकर बार एसोसिएशन ने आम सभा आयोजित कर अधिवक्ताओं से राय ली और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। सभा में अधिकांश वक्ताओं ने हाईकोर्ट को नैनीताल से अन्यत्र ले जाने के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया।
पूर्व अध्यक्ष ओंकार गोस्वामी ने कहा कि किसी भी आंदोलन का निर्णय जल्दबाजी में लेने के बजाय सभी सहयोगी अधिवक्ताओं से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहमति के बाद ही आंदोलन की अगली दिशा तय की जाए।
पूर्व अध्यक्ष नीरज साह ने हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं पूर्व अध्यक्ष मनीष मोहन जोशी ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए जरूरत पड़ने पर आंदोलन शुरू करने की बात कही।
उप सचिव नीरज गोस्वामी ने कहा कि उत्तराखंड का करीब 85 प्रतिशत भूभाग पर्वतीय है, लेकिन राज्य के अधिकांश बड़े संस्थान मैदानी क्षेत्र में केंद्रित हैं। अब हाईकोर्ट को भी तराई क्षेत्र में ले जाने की कवायद पहाड़ों से पलायन की समस्या को और बढ़ा सकती है।
पूर्व अध्यक्ष भगवत प्रसाद ने कहा कि अब तक स्थापित हाईकोर्ट को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का उदाहरण सामने नहीं आया है। उन्होंने हाईकोर्ट को नैनीताल में ही बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।सभा में तरुण चंद्रा, मनीष कांडपाल, अशोक मौलेखी, सोहन तिवारी, रचित तिवारी, पूर्व सचिव भानू प्रताप सिंह मौनी, नवीन पंत, संध्या शर्मा, कैलाश जोशी तथा जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील शर्मा समेत कई अधिवक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए हाईकोर्ट शिफ्टिंग का विरोध किया।
जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष अरुण बिष्ट ने कहा कि एसोसिएशन पहाड़ के हितों के साथ खड़ी है। हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध में आगे की रणनीति तय करने से पहले प्रदेश की अन्य बार एसोसिएशनों से भी वार्ता की जाएगी। इसके बाद सामूहिक रूप से आंदोलन की दिशा तय की जाएगी। सभा का संचालन सचिव संजय सुयाल ने किया।
इस दौरान उपाध्यक्ष कमल चिलवाल, सचिव संजय सुयाल, कार्यकारिणी सदस्य निर्मल कुमार, बिलाल अहमद, तारा आर्या, सरिता बिष्ट, मान सिंह बिष्ट, सुनील बिष्ट, हेमा शर्मा, पूजा साह, किरण आर्या, कमला अधिकारी, दीपक दत्त पांडे, मो. तय्यब, अब्दुल समीर, हरेंद्र सिंह, अनिल वाल्मीकि, बीके सांगुड़ी, पवन खनायत समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।