अल्ट्रासाउंड को लेकर आशा कार्यकर्ता और रेडियोलॉजी स्टाफ आमने-सामने… आशा कार्यकर्ता ने गर्भवती महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था की मांग… रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। बीडी पांडे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा को लेकर आशा कार्यकर्ता और रेडियोलॉजी विभाग के बीच विवाद सामने आया। आशा कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए होने वाली परेशानी का हवाला देते हुए उनके लिए अलग व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई।

वहीं, रेडियोलॉजी विभाग ने आरोपों को स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्पताल में निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है।
आशा कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि आए दिन मरीज अल्ट्रासाउंड नहीं होने की शिकायत लेकर आशा कार्यकर्ताओं से भी संपर्क करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि गर्भवती महिलाओं को एक दिन में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है तो उनके लिए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से भी इस मामले का संज्ञान लेकर गर्भवती महिलाओं के लिए अलग अल्ट्रासाउंड व्यवस्था के लिए स्थान उपलब्ध कराने की मांग की।
कमला कुंजवाल ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को मरीजों के फार्म भरने के बाद उनसे अल्ट्रासाउंड कराने की सिफारिश करने की स्थिति में परेशानी होती है। उनका कहना है कि मरीज सीधे अस्पताल पहुंचें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उनका अल्ट्रासाउंड हो, ताकि आशा कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दिलाने के लिए किसी तरह की पैरवी न करनी पड़े।
रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर रविंद्र कुमार ने बताया कि विवाद के दौरान संबंधित आशा कार्यकर्ता करीब 11 से 11:30 बजे के बीच आई थीं। उनके अनुसार जिस मरीज का अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही जा रही थी, वह मौके पर मौजूद नहीं था और उनके पास मरीज की ओपीडी पर्ची भी नहीं थी। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता सीधे टोकन लेने का प्रयास कर रही थीं।

स्टाफ ने पहले मरीज को बुलाने और उसकी समस्या जानने की बात कही, जिसके बाद विवाद की स्थिति बनी।
डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल में सुबह से ही अल्ट्रासाउंड के स्लॉट भर जाते हैं। शुरुआती समय में करीब 30 अल्ट्रासाउंड नियमित मरीजों के लिए रखे जाते हैं, जबकि करीब 8 से 10 अल्ट्रासाउंड दूर-दराज से आने वाले इमरजेंसी मरीजों के लिए रखे जाते हैं। इस तरह प्रतिदिन करीब 35 से 40 मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इमरजेंसी होने पर मरीज का अल्ट्रासाउंड प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है, जबकि गैर-जरूरी मामलों में मरीज को अगले दिन का समय दिया जाता है। किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड के लिए मना नहीं किया जाता।
पीएमएस द्रोपदी गर्ब्याल ने बताया कि टोकन व्यवस्था के तहत मरीजों को क्रम से सुविधा दी जाती है। जब टोकन की संख्या अधिक हो जाती है तो मरीजों की स्थिति के अनुसार प्राथमिकता तय की जाती है। भर्ती मरीजों, गर्भवती महिलाओं और इमरजेंसी मरीजों के अल्ट्रासाउंड प्राथमिकता के आधार पर किए जाते हैं। यदि किसी मरीज की स्थिति आपातकालीन नहीं है और उस दिन अधिक भीड़ है तो उसे अगले दिन बुलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि विवाद के बाद दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी गई। उनका कहना था कि मामले में दोनों पक्षों की बात सुनना जरूरी है। उन्होंने स्टाफ और आशा कार्यकर्ता दोनों से अपना व्यवहार और बोलने का लहजा ठीक रखने को कहा। अस्पताल में मरीज, तीमारदार, आशा कार्यकर्ता या कर्मचारी सभी के साथ बेहतर व्यवहार होना चाहिए।

पीएमएस ने बताया कि बुधवार और शनिवार को गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण का दिन होने के कारण इन दिनों उनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक रहती है। हालांकि गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के लिए कोई एक दिन निर्धारित नहीं है और जरूरत के अनुसार अन्य दिनों में भी उनकी जांच की जाती है।