नैनीताल। जिले में गौवंशीय पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग ने बचाव और रोकथाम के लिए अभियान तेज कर दिया है। अब तक जिले में 1,22,301 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। बीमारी की पुष्टि के लिए भेजे गए 42 नमूनों में से 12 की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिनमें तीन पशु संक्रमित पाए गए हैं। इनमें दो मामले राजपुरा स्थित गौशाला और एक गोविन्दपुर गढ़वाल क्षेत्र से सामने आया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सिंह के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं में लम्पी वायरस से संबंधित शिकायतें मिलने के बाद विभाग ने निगरानी और टीकाकरण की कार्रवाई बढ़ा दी है। पशुपालन पर निर्भर परिवारों की संख्या को देखते हुए संक्रमण की रोकथाम के लिए जिले में 163 टीमों को फील्ड में तैनात किया गया है।
टीमें गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण करने के साथ पशुपालकों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। साथ ही बीमारी के लक्षण, बचाव और संक्रमण से संबंधित जरूरी जानकारी भी दी जा रही है।
संक्रमण को अन्य क्षेत्रों में फैलने से रोकने के लिए बाहरी राज्यों और दूसरे स्थानों से महिषवंशी एवं गौवंशीय पशुओं के परिवहन पर प्रतिबंध लगाया गया है। विभाग के अनुसार पशुओं के आवागमन के कारण संक्रमण के फैलने की संभावना रहती है, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक पशु के शरीर पर गांठें निकलना, बुखार आना तथा आंख या नाक से पानी आना जैसे लक्षण दिखाई देने पर उसे तत्काल अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग कर पृथक स्थान पर रखना चाहिए।
पशु बाड़े में नियमित साफ-सफाई रखने और मच्छर-मक्खियों की रोकथाम के लिए कीटनाशक का छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है। किसी पशु में संदिग्ध लक्षण मिलने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा विभागीय टीम से संपर्क करने को कहा गया है।
डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि विभाग की टीमें प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं तथा घर-घर पहुंचकर पशुपालकों को बीमारी से बचाव की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने पशुपालकों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि समय पर टीकाकरण, संक्रमित पशु को अलग रखना और साफ-सफाई के उपायों से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।





