डीएसबी परिसर में पुस्तक दान महोत्सव का आयोजन.. इंटरनेट के दौर में पुस्तकों का महत्व बरकरार, बच्चों में पढ़ने की आदत डालना जरूरी : प्रो. बिष्ट… रिपोर्ट- (सुनील भारती) ‘स्टार खबर’ नैनीताल…

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नैनीताल। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों में पुस्तकों के प्रति घटती रुचि को देखते हुए सोमवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में पुस्तक दान महोत्सव का आयोजन किया गया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के सौजन्य से आयोजित महोत्सव में बच्चों को पुस्तकों के महत्व से अवगत कराने के साथ ही उनमें नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने का संदेश दिया गया। इस दौरान प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकें वितरित कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि इंटरनेट के इस दौर में सूचनाओं की उपलब्धता तो बढ़ी है, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी बरकरार है। इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक जानकारी की प्रमाणिकता सुनिश्चित नहीं होती, जबकि पुस्तकों को लेखन, संपादन और प्रूफ रीडिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद प्रकाशित किया जाता है। ऐसे में पुस्तकों के माध्यम से प्राप्त ज्ञान अधिक व्यवस्थित, विश्वसनीय और संदर्भ आधारित होता है।

उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति कम होना चिंता का विषय है। नई पीढ़ी को कम उम्र से ही पुस्तकों से जोड़ना और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करना जरूरी है। पुस्तक दान महोत्सव इसी उद्देश्य से की गई एक सार्थक पहल है, जिसके माध्यम से बच्चों तक अच्छी पुस्तकें पहुंचाकर अध्ययन के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रो. बिष्ट ने कहा कि सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में प्रमाणिक पुस्तकों और मूल स्रोतों का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को अध्ययन के दौरान पुस्तक के लेखक, स्रोत और संदर्भ पर भी ध्यान देना चाहिए। केवल इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री के भरोसे रहने के बजाय मानक पुस्तकों का नियमित अध्ययन करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट और पुस्तकें एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति के पूरक माध्यम हैं। इंटरनेट जहां त्वरित जानकारी उपलब्ध कराता है, वहीं पुस्तकों के अध्ययन से विषय की गहरी और क्रमबद्ध समझ विकसित होती है। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ अपने नोट्स तैयार करने की आदत भी डालनी चाहिए। उन्होंने भविष्य में भी पुस्तक मेलों और पुस्तक दान जैसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।कार्यक्रम में नैनीताल विधायक सरिता आर्या और उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।