★. निजी स्कूलों की मनमानी पर जिलाधिकारी सख्त, फीस-किताब-यूनिफॉर्म पर जारी किए कड़े निर्देश ★.  अब अभिभावकों पर नहीं चलेगा दबाव, तय दुकान से किताब-ड्रेस खरीदने पर रोक (चन्दन सिंह बिष्ट) “स्टार खबर”  

365

★. निजी स्कूलों की मनमानी पर जिलाधिकारी सख्त, फीस-किताब-यूनिफॉर्म पर जारी किए कड़े निर्देश

★.  अब अभिभावकों पर नहीं चलेगा दबाव, तय दुकान से किताब-ड्रेस खरीदने पर रोक

(चन्दन सिंह बिष्ट) “स्टार खबर”

नैनीताल /हल्द्वानी

जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने जनपद में संचालित निजी विद्यालयों द्वारा फीस निर्धारण, पाठ्य पुस्तकों एवं यूनिफॉर्म को लेकर अपनाए जा रहे विशुद्ध व्यवसायिक व्यवहार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत शिक्षा एक परोपकारी गतिविधि है, जिसे लाभ कमाने का साधन नहीं बनाया जा सकता।

जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय न्यायालयों के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक दुकान अथवा किसी विशेष प्रकाशन से पुस्तक या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है और यह पूर्णतः प्रतिबंधित है।

उन्होंने उत्तराखण्ड शासन में प्रचलित शासनादेशों का उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी/एससीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए। फीस वृद्धि पारदर्शी, औचित्यपूर्ण हो तथा अभिभावकों से संवाद एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) से परामर्श के बाद ही की जाए। फीस वृद्धि का लिखित औचित्य पूर्व वर्षों के अभिलेखों सहित सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देशित किया कि प्रवेश के समय छात्र-छात्राओं की आयु का विशेष ध्यान रखा जाए। शैक्षिक सत्र की प्रारंभ तिथि 01 अप्रैल को जिन बच्चों की आयु 06 वर्ष पूर्ण हो चुकी हो, केवल उन्हें ही कक्षा-1 में प्रवेश दिया जाए।

उन्होंने मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद के समस्त निजी विद्यालयों में बिना किसी ठोस कारण और अभिभावक अथवा एसएमसी से परामर्श किए बिना फीस वृद्धि न होने दी जाए। साथ ही यूनिफॉर्म के लिए किसी विशेष दुकान या विक्रेता से खरीद हेतु बाध्य करना प्रतिबंधित रहेगा। यूनिफॉर्म का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो सामान्य बाजार में आसानी से उपलब्ध हो तथा अनावश्यक रूप से बार-बार यूनिफॉर्म में परिवर्तन न किया जाए।

पाठ्य पुस्तकों के संबंध में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि एनसीईआरटी/एससीईआरटी अथवा शासन द्वारा अनुमन्य पाठ्यक्रम की पुस्तकों को ही प्राथमिकता दी जाए। किसी विशेष प्रकाशन या दुकान से पुस्तक खरीदने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। कापियों पर विद्यालय का लोगो लगाने पर भी रोक लगाई गई है।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय को अपने फीस स्ट्रक्चर, यूनिफॉर्म एवं पुस्तक सूची को विद्यालय परिसर के नोटिस बोर्ड एवं वेबसाइट (यदि उपलब्ध हो) पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त कोई भी अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।

जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षाधिकारी को यह भी निर्देश दिए कि जनपद के समस्त निजी विद्यालयों का निरीक्षण मुख्य शिक्षाधिकारी अथवा जिला शिक्षाधिकारी द्वारा नामित जांच समिति से कराया जाए। निरीक्षण रिपोर्ट अभिलेखीय साक्ष्यों सहित जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत की जाए।