सरोवर नगरी नैनीताल के होटल कारोबारी व व्यवसायी,शासन और प्रशासन की नॉन कोआपरेटिव कार्यशैली से हुए त्रस्त.. आगामी पर्यटक सीज़न तक भी सुधार की कोई उम्मीद नही…
सरोवर नगरी नैनीताल के व्यापारी आजकल शासन व प्रशासन की बेरुखी के चलते ज्यादा परेशान दिखाई दे रहे हैं।एक तो पिछले 10 माह पहले एक नाबालिक बालिका से रेप मामले में क्षेत्र पर गिरी अव्यवस्थाओं की गाज़ व मज़हबी दंश के चलते यहां से पर्यटक नदारत हैं।उस पर पुलिस प्रशासन का तुर्रा यह है कि रात 11बजे के बाद बाजार सुरक्षा के दृष्टिगत पूरी तरह से बंद कराये जा रहे हैं। व सड़कों पर भी पर्यटकों की आवाजाही पर बंदिशें यह कह कर लगा दी गई हैं कि उच्चाधिकारियों के आदेशों के तहत टहलने तक की इजाज़त नही है।आपको बता दें कि नैनीताल में अधिकतर बाजार रात 8-9 बजे तक बंद हो जाते है।कुछ बाजार क्षेत्रों में केमिस्ट व रेस्टॉरेन्टस झील नगरी में पर्यटकों का आगमन देर तक होने के कारण रात 12 से एक बजे तक खुले रहते हैं।लेकिन पिछले 10-12 दिनों से पुलिस द्वारा यहाँ जबरदस्त सख्ती की जा रही है जैसे यह क्षेत्र पाकिस्तान बॉर्डर से जुड़ता हो।बाजारों को रात्रि 11 बजे बंद किये जाने के संबंध में श्रम विभाग उत्तराखंड द्वारा एक पत्र भी जारी किया गया है जिसमे 24/7 भी दुकानों,व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आवश्यकतानुसार खोले रखने की इजाज़त श्रम कानूनों के अंतर्गत दी गई है।

उत्तराखंड सरकार से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील व्यापार मंडल नैनीताल व होटल एसोशिएशन ने की..ताकि होटल उद्यमियों ,व्यवसायियों व छोटे फड़ कारोबारियों को भी जीवित रहने का अधिकार मिल सके…
नैनीताल होटल एसोशिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने बताया कि सुरक्षा कारणों से बाजारों को जबरन बंद करवाना व देर रात तक बिखने वाली रौनक पर प्रतिबंध पूरी तरह से अनुचित है।ऐसे तो झील नगरी को खत्म करने की पूर्व नियोजित योजना प्रतीत होती है।
माँ नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने स्टार ख़बर से संबंध में व्यापारियों के कारोबार की बद्दतर स्थिति व पर्यटकों के आभाव में फैले सन्नाटे का जिक्र किया।उन्होंने कहा कि पहले तो नगरपालिका प्रशासन ने पार्किंग शुल्क में 500%,व प्रवेश शुल्क में लगभग 250% की वृद्धि पिछले वर्ष कर दी गई।उन्होंने बताया कि देर रात चहलकदमी के दौरान उन्होंने देखा कि कुछ पर्यटक भोजन व बच्चों के लिए दूध, दवाइयों के लिए भी इधर उधर भटकते परेशान नज़र आए।शहर के व्यवसायी व होटल कारोबारी पहले टूटी हुई मॉल रोड की मरम्मत में विलंब,नए पार्किंग स्थल न बनाये जाने, पुराने पार्किंग स्थलों को संवारने के लिए उद्घाटन तो किये गए पर बज़ट के आभाव में अब तक कोई काम शुरू होता हुआ दिखाई नही दिया।और ज्यादा दुःखद यह है कि इसका संज्ञान शासन भी नही लेना चाहता कि पर्यटक सीज़न से पूर्व ये सभी काम कैसे पूर्ण किये जाएंगे..?









