नैनीताल से था पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी का गहरा नाता… ससुराल, मां पाषाण देवी और राजनीति में आने की प्रेरणा से जुड़ी हैं कई यादें… रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल…

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नैनीताल। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता भुवन चंद्र खंडूरी का नैनीताल से विशेष आत्मीय रिश्ता रहा। सरोवर नगरी केवल उनका पसंदीदा शहर ही नहीं, बल्कि उनका ससुराल भी रही। उनके निधन की खबर के बाद नैनीताल में भी शोक की लहर है और लोग उनसे जुड़ी यादों को भावुक होकर याद कर रहे हैं।राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन में सख्त छवि रखने वाले खंडूरी का नैनीताल से जुड़ा एक बेहद रोचक और चर्चित प्रसंग आज भी लोगों के बीच चर्चा में रहता है। बताया जाता है कि सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वह राजनीति में आने की तैयारी कर रहे थे और उस समय उनका मन कांग्रेस में जाने का था। इसी दौरान उन्हें सपने में मां पाषाण देवी मंदिर के दर्शन हुए। कहा जाता है कि मां ने उन्हें कमल  के फूल को पकड़े हुए दर्शन दिया, जिसके बाद उन्होंने इसे संकेत मानते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।

बीजेपी नेता गोपाल रावत बताते हैं कि खंडूरी जी का नैनीताल से गहरा भावनात्मक लगाव था। उनकी पत्नी अरुणा खंडूरी ने नैनीताल के बिड़ला स्कूल से शिक्षा प्राप्त की थी और उनके ससुर नैनवाल दरोगा शहर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में गिने जाते थे।
नैनीताल आने पर खंडूरी हमेशा मां पाषाण देवी के दर्शन के लिए जरूर जाते थे। शहर से उनका अपनापन इतना था कि जनसभाओं में भी वह लोगों को “भाइयों और बहनों” की जगह “देवियों और सज्जनों” कहकर संबोधित करते थे। इसके पीछे वजह यह मानी जाती थी कि नैनीताल उनका ससुराल था और वह इस रिश्ते की मर्यादा का विशेष ध्यान रखते थे।
पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी को एक कड़े लेकिन अनुशासित प्रशासक के रूप में याद किया जाता है। नैनीताल झील की स्वच्छता, शहर की व्यवस्थाओं में सुधार और भवनों की ऊंचाई संबंधी नीतियों में उनका अहम योगदान माना जाता है। प्रशासनिक बैठकों में समय की पाबंदी को लेकर भी वह काफी सख्त रहते थे और अक्सर अधिकारियों से पहले बैठक स्थल पर पहुंच जाते थे।
उनके निधन से जहां पूरे उत्तराखंड में शोक है, वहीं नैनीताल के लोगों के लिए यह व्यक्तिगत क्षति जैसा महसूस हो रहा है। शहर आज अपने उस “दामाद” को नम आंखों से याद कर रहा है, जिसने हमेशा नैनीताल को विशेष सम्मान और अपनापन दिया।