कैंची धाम मेले में उम्मीद से कम रही भीड़… व्यापारियों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल… रिपोर्ट- (ब्यूरो) “स्टार खबर” नैनीताल…

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नैनीताल।भवाली श्री कैंची धाम स्थापना दिवस मेले में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मेले के दौरान स्थानीय व्यापारियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा लागू की गई सख्त यातायात एवं प्रवेश व्यवस्था का असर श्रद्धालुओं की संख्या पर देखने को मिला है।

उनका दावा है कि अपेक्षित भीड़ नहीं पहुंच सकी और कई श्रद्धालुओं को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार 13 से 16 जून तक लागू विशेष व्यवस्थाओं, शटल सेवा और प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों के कारण श्रद्धालुओं को असुविधा हुई। उनका कहना है कि कई लोगों को चार से पांच किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा, जिसके चलते आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी मेले में पहुंचने से कतराते रहे।

व्यापारियों ने आरोप लगाया कि मेले की तैयारियों को लेकर स्थानीय व्यापार मंडल, होटल व्यवसायियों और क्षेत्रीय लोगों के साथ पर्याप्त समन्वय नहीं किया गया। उनका कहना है कि व्यवस्थाओं से संबंधित निर्णयों की जानकारी भी अधिकांश लोगों को अखबारों के माध्यम से मिली।

व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने का दावा करते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि कैंची क्षेत्र से लेकर भुजियाघाट तक कई दुकानों में अपेक्षित ग्राहक नहीं पहुंचे। होटल कारोबार पर भी प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है।

वहीं, श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा भी रही कि एक व्यक्ति अपने परिजनों के लिए प्रसाद ले जाने के उद्देश्य से कई बार मंदिर परिसर में प्रवेश कर रहा था, क्योंकि सभी लोग स्वयं दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या प्रशासनिक दावों की तुलना में कम रही और लगभग 80 हजार लोगों ने ही दर्शन किए। उनका सवाल है कि यदि व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाई गई थीं तो फिर अपेक्षित संख्या में भक्त क्यों नहीं पहुंचे।हालांकि प्रशासन का कहना है कि मेले में सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे। शटल सेवाओं और यातायात प्रबंधन का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित कर सुगम दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना था।

मुख्य सवाल

●क्या सख्त यातायात व्यवस्था श्रद्धालुओं की संख्या कम होने का कारण बनी?

●क्या स्थानीय व्यापारियों और संगठनों को पर्याप्त रूप से विश्वास में नहीं लिया गया?

●क्या सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाने में प्रशासन सफल रहा?

●80 हजार श्रद्धालुओं के आंकड़े के बाद भी अपेक्षित भीड़ क्यों नहीं पहुंच सकी?

कैंची धाम मेले के समापन के बाद अब इन सवालों पर चर्चा तेज हो गई है और स्थानीय व्यापारी प्रशासन से भविष्य में बेहतर समन्वय की मांग कर रहे हैं।