नरेश पांडे प्रकरण: शिकायतकर्ता युवती को कोर्ट से तत्काल जमानत, गिरफ्तारी पर पुलिस से पूछे सवाल…. 30 हजार रुपये के मुचलके पर मिली रिहाई, अदालत ने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया पर जताई आपत्ति…. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे से जुड़े चर्चित प्रकरण में पुलिस को अदालत से बड़ा झटका लगा है। मामले में गिरफ्तार की गई पहली शिकायतकर्ता युवती को कोर्ट ने पेशी के दौरान ही 30 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस से कई सवाल भी किए।

गौरतलब है कि नरेश पांडे के खिलाफ सबसे पहले इसी युवती ने मल्लीताल कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में वह अपने पूर्व बयानों से पलट गई। इसी बीच एक अन्य युवती सामने आई, जिसने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि नरेश पांडे और पहली शिकायतकर्ता मिलकर अन्य युवतियों, विशेषकर कॉलेज छात्राओं, को अपने जाल में फंसाते थे। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि पहली युवती ही उसे नरेश पांडे के पास लेकर गई थी।

इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने पहली शिकायतकर्ता युवती को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। हालांकि अदालत ने सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी के औचित्य और कानूनी प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए उसे जमानत दे दी।
शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता जयंत नैनवाल ने बताया कि जिस एफआईआर में युवती स्वयं पीड़िता के रूप में दर्ज थी, उसी मामले में पुलिस ने उसे आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 के तहत लगाए गए आरोपों की कानूनी व्याख्या और धारा 63 की परिभाषा के अनुसार अदालत ने मामले का परीक्षण किया। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सतीन्द्र कुमार अंतिल निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होनी चाहिए। अदालत ने इन कानूनी बिंदुओं पर विचार करते हुए जमानत प्रदान की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से गिरफ्तारी की प्रक्रिया और कानूनी आधार पर भी जवाब मांगा। अधिवक्ता के अनुसार पुलिस संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिसके बाद अदालत ने युवती को 30 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
मामले के इस घटनाक्रम के बाद गिरफ्तारी की आवश्यकता, कानूनी प्रक्रिया के पालन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, पूरे प्रकरण की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।