नैनीताल। उत्तराखंड के लगभग 22 हजार उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वर्ष 2018 में दिए गए नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान संबंधी आदेशों का अनुपालन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पूर्व आदेशों के पालन में और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने के संबंध में विचार किया जा रहा है, हालांकि इसके लिए कर्मचारियों से अनुबंध भरवाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए वर्ष 2018 के आदेश का सीधा अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
अब राज्य सरकार को आगामी 2 जुलाई को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान के संबंध में क्या कार्रवाई की गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वर्ष 2024 में वहां से भी सरकार को राहत नहीं मिली। इसके बाद उपनल कर्मचारी अवमानना याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचे हुए हैं।
सुनवाई के दौरान सरकार ने पहले मामले के कैबिनेट में विचाराधीन होने का हवाला दिया था। बाद में यह भी तर्क रखा गया कि आदेशों के अनुपालन से राज्य पर करीब 1300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। हालांकि हालिया सुनवाई में सरकार का रुख कुछ नरम दिखाई दिया है।
करीब आठ वर्ष पहले कर्मचारियों के पक्ष में आया फैसला आज भी पूरी तरह लागू नहीं हो सका है। ऐसे में राज्यभर के हजारों उपनल कर्मचारियों की निगाहें अब सरकार और अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार निर्धारित दो सप्ताह के भीतर कर्मचारियों को नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान को लेकर कोई ठोस राहत दे पाएगी, या फिर मामला आगे भी लंबा खिंचेगा।
फिलहाल कानूनी स्तर पर सरकार के विकल्प सीमित नजर आ रहे हैं और आने वाले दिनों में इस मामले पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।







