नैनीताल। जिले में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से गुरुवार को नैनीताल के अल्मा कॉटेज क्षेत्र में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) पर आधारित एक व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास के दौरान प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, फायर सर्विस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाकर मलबे में दबे आठ लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।
उपजिलाधिकारी नवाजिश खलीक ने बताया कि सुबह 9:12 बजे अल्मा कॉटेज क्षेत्र में भारी भूस्खलन, मकानों के क्षतिग्रस्त होने और लोगों के मलबे में फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही स्टेजिंग एरिया में सभी आवश्यक संसाधन एकत्र किए गए और तहसीलदार नैनीताल (इंसिडेंट कमांडर) के नेतृत्व में राहत एवं बचाव दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
अभियान में एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्थानीय पुलिस, सिविल प्रशासन, लोक निर्माण विभाग तथा खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों ने बेहतर समन्वय के साथ राहत कार्य संचालित किया। रेस्क्यू के दौरान मलबे में फंसे आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें तीन गंभीर रूप से घायल पाए गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। एक सामान्य घायल का उपचार स्टेजिंग एरिया में कर छुट्टी दे दी गई, जबकि चार अन्य घायलों को घटनास्थल पर ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया।
मॉक ड्रिल के दौरान प्रभावित क्षेत्र की बिजली एवं पेयजल आपूर्ति को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद किया गया, ताकि किसी प्रकार की द्वितीयक दुर्घटना की संभावना न रहे। साथ ही मलबा हटाने और क्षति के आकलन की प्रक्रिया का भी व्यावहारिक अभ्यास किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की जानकारी देते हुए डॉ. अनिरुद्ध गंगोला ने बताया कि राहत एवं बचाव अभियान के लिए दो एम्बुलेंस चिकित्सकों और सपोर्ट स्टाफ के साथ मौके पर तैनात रहीं। स्टेजिंग एरिया में तीन चिकित्सकों की टीम मौजूद रही, जबकि जिला चिकित्सालय में भी एक विशेष मेडिकल टीम को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट रखा गया था।
प्रशासन के अनुसार इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में जनहानि और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।







