नैनीताल । उत्तराखंड के राज्यपाल एवं कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने मंगलवार को कुमाऊँ विश्वविद्यालय के भीमताल स्थित सर जे.सी. बोस तकनीकी परिसर में प्रधानमंत्री-ऊषा योजना की मेरू योजना के तहत निर्मित ‘सीडीएस जनरल बिपिन रावत फार्मेसी अकादमिक ब्लॉक’ का वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उनका जीवन अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों से जनरल रावत के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि भारत स्वास्थ्य, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में फार्मेसी शिक्षा केवल दवा निर्माण तक सीमित न रहकर जनस्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, किफायती दवाओं के विकास, औषधीय अनुसंधान और वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान का विशेष महत्व है तथा विश्वविद्यालयों को ज्ञान और नवाचार के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री-ऊषा योजना के अंतर्गत कुमाऊँ विश्वविद्यालय में विकसित हो रही आधुनिक शैक्षणिक अवसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और उन्नत अनुसंधान सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि नया अकादमिक ब्लॉक प्रदेश और देश में फार्मेसी शिक्षा एवं अनुसंधान को नई दिशा देगा।
राज्यपाल ने कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का फार्मेसी विभाग लगातार सात वर्षों से राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में स्थान बनाए हुए है, जो उसकी शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुसंधान उत्कृष्टता का प्रमाण है।
फार्मेसी विभागाध्यक्ष प्रो. कुमुद उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग की उपलब्धियों और नए भवन की विशेषताओं की जानकारी दी। वहीं कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राज्यपाल का सतत मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने बताया कि यह अत्याधुनिक भवन फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के मानकों के अनुरूप स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान गतिविधियों और कौशल विकास के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन बायोमेडिकल संकायाध्यक्ष प्रो. महेंद्र राणा ने किया। इस अवसर पर प्रभारी कुलसचिव राजेश विश्वकर्मा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।







