उत्तराखंड क्रांति दल ने कहा- मुख्य पीठ का स्थानांतरण राज्य गठन की मूल भावना के विपरीत, प्रस्ताव पर रोक लगाने की मांग.. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर ” नैनीताल…

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नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर मुख्य पीठ के प्रस्तावित स्थानांतरण पर पुनर्विचार की मांग की है।प्रतिवेदन में कहा गया है कि उत्तराखंड राज्य का गठन पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास, न्यायिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं को पर्वतीय क्षेत्र में स्थापित रखने तथा राज्य की मूल अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से हुआ था। नैनीताल में उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ की स्थापना भी इसी ऐतिहासिक परिकल्पना का हिस्सा थी। ऐसे में मुख्य पीठ को मैदानी क्षेत्र में स्थानांतरित करना राज्य गठन की मूल भावना के विपरीत होगा।यूकेडी ने अपने ज्ञापन में 15 जुलाई 2026 को पारित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ के स्थानांतरण का विषय न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षेत्राधिकार का विषय है। इसलिए इस संबंध में आगे की किसी भी कार्रवाई को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।ज्ञापन में उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 26(2) का हवाला देते हुए कहा गया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ का स्थान राष्ट्रपति की अधिसूचना से निर्धारित है। इसलिए मुख्य पीठ के स्थान में किसी भी परिवर्तन से पूर्व संवैधानिक एवं वैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन आवश्यक है।

उत्तराखंड क्रांति दल ने यह भी कहा कि पिछले 25 वर्षों में नैनीताल उच्च न्यायालय के कारण क्षेत्र में अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मियों, शिक्षण संस्थानों, व्यापारियों, परिवहन एवं पर्यटन सहित अनेक क्षेत्रों का विकास हुआ है। मुख्य पीठ के स्थानांतरण से स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और विधिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में न्यायिक प्रशासन अथवा आधारभूत संरचना संबंधी कारणों से मुख्य पीठ का स्थानांतरण अपरिहार्य माना जाए, तो उसे पर्वतीय क्षेत्र के भीतर ही रखा जाए और राज्य की स्थायी राजधानी विकसित होने के बाद गैरसैंण में स्थापित करने पर विचार किया जाए।
उत्तराखंड क्रांति दल ने राज्यपाल से मांग की है कि मुख्य पीठ के स्थानांतरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को तब तक स्वीकृति न दी जाए, जब तक इस विषय के विधिक, संवैधानिक एवं लोकहित से जुड़े सभी पहलुओं पर व्यापक विचार न हो जाए। साथ ही प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए राज्य मंत्रिपरिषद को वापस भेजने तथा ज्ञापन को भारत के राष्ट्रपति एवं विधि एवं न्याय मंत्रालय को अग्रेषित करने का भी अनुरोध किया गया है।